29 March, 2011

पूनिया की शादी

उमंग में नवेता पुकारता गॉवो का चौकीदार
चिलम की चुस्की लेने हज़ाम की दूकान पहुँचा
पर धीरे धीरे कई उत्सुक लोगो की भीड़ जमी
चिलम सुलगा उसने एक ज़ोर की तान भरी

पर मुँह से धुएँ के साथ जो निकला
लोगों के अवाक चेहरों पे जा कर लगा
बड़ी खिलाड़ी थी अपनी पूनिया भी
ज़मींदार के डर से बात गले अटक गयी

और कहा कई मेडल जीते हैं पूनिया ने
चौकीदार लगा कुछ छुपा रहा है राज़
लोगों के समझ आ गयी कुछ है बात
चौकीदार को भी आया ये याद
पूनिया तो कभी कुछ खेलती ही नही

इतने लोगों की आँखें खुद पर टिकी देख
चौकीदार थोड़ा घबराया, आँखें नीची की
और काफ़ी सारे कस एक साथ लगाया
फिर यादों के धुंधले परत सॉफ करने लगा
पूनिया का सारा प्रसंग चोंक पे नंगा होने लगा

ज़मींदार की बेटी, जो बुजुर्गों के लिए थी मिसाल
उसके निकले कई नोंजावानों से प्यार के गाँठ,
उनमें से तीन के नाम चौकीदार को थे याद
रगरु के बाद घुसलू और जूज्जी उसके थे पात्र

पूनिया की पहली आँख रगरु से मिली थी
स्कूल में मिले थे दोनो, बेचारी बड़ी सीधी थी
नयी जवानी में दिमाग़ थोड़ी कम चली
पर रगरु के साथ सब जल्दी ख़त्म हुआ
अच्छी किस्मत थी, ज़यादा कुछ नही हुआ

अब थी घुसलू की बारी, आवारा और अय्याशी
फँस गयी उसकी जाल में अपनी पूनिया बेचारी
कॉलेज के नाम पे शहर जाना, घर देर से आना
ज़मींदार को अंदेशा लगा, इसमे कुछ काला है
और लगा दी पाबंदी, घर के बाहर नही जाना है

पर किस्मत तो घुसलू के साथ होती है
पूनिया तो बस उसकी टाइम पास होती है
भूस्की रानी अब उसे जो मिल गयी थी
कॉलेज फिर से नियमित चलने लगी थी

पूनिया को जब पता चला, लाख कोशिश की
पर घुसलू दिल दिमाग़ से नही निकला
कुछ महीने लगे, पर अंत में आँख खुली
मेले में घुसलू के साथ चिपकी भूस्की दिखी

सब कुछ बेचारा जूज्जी बरसों देखता रहा था
पूनिया के ठुकराने पर भी प्यार करता रहा
सच्चा प्यार शायद एक तरफ़ा ही होता है
ये तसल्ली कर प्यार में जलता रहता है

पूनिया ने ठान ली अब, हुआ बहुत प्रेम प्रसंग
शादी कही भी कर लेगी जो पिता की हो पसंद
पूनिया की शादी दीनानाथ मास्टर से होनी है
घुसलू की चाँदी, पर जूज्जी का प्यार धनी है

14 March, 2011

Tamarind Tree

Looked in to my watch
I knew, I gotta be late
Not moved a bit to rush
No energy to make up

Eyes kept watching
Traffic running around
Found myself standing
like dead man in the town

I wish you could see me
counting pebbles on road
'n flowers on every door
On my way to our alleyway

Musty me, lost and tired
giving you sense of pride
you were just so right
no you, just body no soul

That's the way you testified
Nice that you stayed alive
I had to leave for your smile
Only one could have survived

I am mute, though watching you
standing next to Tamarind tree
When you find earrings missing
Search on boughs in Spring

04 March, 2011

सिर्फ़ जता ना सके...

तुम जो गये यूँ की
मेरी शामे मुरझा गयी
पत्तों के साथ साथ
हम भी गिरते गये

जब तुम थे तो भी
दिन कुछ ख़ास नही थे
जाना है तुम्हे कभी भी
बस वाट जौहते रहते

ना तुम कभी मेरे थे
कोई ना हक़ था मेरा तुमपे
दरमियाँ थी बात अपने जो
भरे महफ़िल में ना कहते

चाहते हैं तुम्हे दिल से
ना तुम्हे ये समझा सके
जाते हुए दिल तो तोड़ा
मेरी रूह को तो छोड़ते