तुम जो गये यूँ की
मेरी शामे मुरझा गयी
पत्तों के साथ साथ
हम भी गिरते गये
जब तुम थे तो भी
दिन कुछ ख़ास नही थे
जाना है तुम्हे कभी भी
बस वाट जौहते रहते
ना तुम कभी मेरे थे
कोई ना हक़ था मेरा तुमपे
दरमियाँ थी बात अपने जो
भरे महफ़िल में ना कहते
चाहते हैं तुम्हे दिल से
ना तुम्हे ये समझा सके
जाते हुए दिल तो तोड़ा
मेरी रूह को तो छोड़ते
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