बड़ी विचित्र बात है,
लोगों में आज भी बची आग है
हर रोज़ उसी सिरहाने में
खाली पेट के बाल सोते हुए
समस्याओं को कोसते हुए भी
सड़क पर मसाल लेकर चलने की
बस एक परिवर्तन करने की चाह है
निराशावादी पूछते हैं कि
क्या बदल जाएगा ऐसी चाह से
मैं मुस्कुराता सोचता हूँ
लोगों के ज़ज़्बात ना घटे बस
दिन वो दूर नही
जब दिल्ली भी स्विट्ज़र्लॅंड बन जाएगा
13 September, 2011
10 May, 2011
My dead lover
Couldn't make you breathe again
I tried all I could
pumped air holding your face
But my love was dead long before
No no, you not my love
you just some fucking whore
She was caring,
all cares for my feelings
She is dead now, you're her wraith
She was tender, her love was tender
But she is breathing no more
So stop pretending you being her
Go away and find some other lord
My love I want you to breathe back
This wench just making life hell
I do wanna know reasons you are dead
But no point, after all you not breathing
I tried all I could
pumped air holding your face
But my love was dead long before
No no, you not my love
you just some fucking whore
She was caring,
all cares for my feelings
She is dead now, you're her wraith
She was tender, her love was tender
But she is breathing no more
So stop pretending you being her
Go away and find some other lord
My love I want you to breathe back
This wench just making life hell
I do wanna know reasons you are dead
But no point, after all you not breathing
08 May, 2011
या खुदा ये तू नही हो सकता
या खुदा ये तू नही हो सकता
बुझे दिल में तेरी शान नही होती
ये तो मेरे अरमानों का मकबरा है
यहा तू कभी नही बैठ सकता
ये तू नही, ना तेरे क़ायदे हो सकते
यहा तेरे इस बंदे का कतल हुआ है
जो मज़ार बनाया है उसके नाम का
तेरी शान वहाँ आने से कहाँ
ये ज़ुल्म ना कर आका मेरे उपर
इंसानो को समझ मेरी लब नही आई
पर तू तो इंसानियत की कदर कर
बस चला जा यहा से मेरी रूह ले कर
मजबूर होना जायुं मैं तुझे छोड़ने पर
मेरे मौला, ये बदनशिबी ईजाद ना कर
इश्क़ के बदले मुझे बर्बाद ना कर
मक़बरे पे मेरे कोई दरगाह ना बक्श
खो जाने दे मुझे गाळीचों में गुमनाम
मेरी मौत को कोई अफ़साना ना बना
इंसानियत की कद बढ़े ये तू नही चाहता
मैं तू नही, पर खुदा ये तू नही हो सकता
बुझे दिल में तेरी शान नही होती
ये तो मेरे अरमानों का मकबरा है
यहा तू कभी नही बैठ सकता
ये तू नही, ना तेरे क़ायदे हो सकते
यहा तेरे इस बंदे का कतल हुआ है
जो मज़ार बनाया है उसके नाम का
तेरी शान वहाँ आने से कहाँ
ये ज़ुल्म ना कर आका मेरे उपर
इंसानो को समझ मेरी लब नही आई
पर तू तो इंसानियत की कदर कर
बस चला जा यहा से मेरी रूह ले कर
मजबूर होना जायुं मैं तुझे छोड़ने पर
मेरे मौला, ये बदनशिबी ईजाद ना कर
इश्क़ के बदले मुझे बर्बाद ना कर
मक़बरे पे मेरे कोई दरगाह ना बक्श
खो जाने दे मुझे गाळीचों में गुमनाम
मेरी मौत को कोई अफ़साना ना बना
इंसानियत की कद बढ़े ये तू नही चाहता
मैं तू नही, पर खुदा ये तू नही हो सकता
27 April, 2011
बापू की पार्टी और उन्ही की लाठी
मिला देश को बापू से
असीमित स्नेह और प्यार
पर विरासत में मिले उनसे
और दो अनोखे उपहार
एक वो ही पुरानी पार्टी छोडी
साथ मिली उनकी लाठी
कहा लगा देना सिर पे लाठी
गर भटके राह से ये पार्टी
ये कैसी अदृश्य लाठी थी
ना समझे पार्टी के ही लोग
सारा देश अचरज में रहा
किया सिर्फ़ अन्ना ने प्रयोग
सत्याग्रह की रह पकड़
चले अगर आज भी कोई
गोरे हो या काले अँगरेज़
झुकेगा उसके आगे हर कोई
असीमित स्नेह और प्यार
पर विरासत में मिले उनसे
और दो अनोखे उपहार
एक वो ही पुरानी पार्टी छोडी
साथ मिली उनकी लाठी
कहा लगा देना सिर पे लाठी
गर भटके राह से ये पार्टी
ये कैसी अदृश्य लाठी थी
ना समझे पार्टी के ही लोग
सारा देश अचरज में रहा
किया सिर्फ़ अन्ना ने प्रयोग
सत्याग्रह की रह पकड़
चले अगर आज भी कोई
गोरे हो या काले अँगरेज़
झुकेगा उसके आगे हर कोई
29 March, 2011
पूनिया की शादी
उमंग में नवेता पुकारता गॉवो का चौकीदार
चिलम की चुस्की लेने हज़ाम की दूकान पहुँचा
पर धीरे धीरे कई उत्सुक लोगो की भीड़ जमी
चिलम सुलगा उसने एक ज़ोर की तान भरी
पर मुँह से धुएँ के साथ जो निकला
लोगों के अवाक चेहरों पे जा कर लगा
बड़ी खिलाड़ी थी अपनी पूनिया भी
ज़मींदार के डर से बात गले अटक गयी
और कहा कई मेडल जीते हैं पूनिया ने
चौकीदार लगा कुछ छुपा रहा है राज़
लोगों के समझ आ गयी कुछ है बात
चौकीदार को भी आया ये याद
पूनिया तो कभी कुछ खेलती ही नही
इतने लोगों की आँखें खुद पर टिकी देख
चौकीदार थोड़ा घबराया, आँखें नीची की
और काफ़ी सारे कस एक साथ लगाया
फिर यादों के धुंधले परत सॉफ करने लगा
पूनिया का सारा प्रसंग चोंक पे नंगा होने लगा
ज़मींदार की बेटी, जो बुजुर्गों के लिए थी मिसाल
उसके निकले कई नोंजावानों से प्यार के गाँठ,
उनमें से तीन के नाम चौकीदार को थे याद
रगरु के बाद घुसलू और जूज्जी उसके थे पात्र
पूनिया की पहली आँख रगरु से मिली थी
स्कूल में मिले थे दोनो, बेचारी बड़ी सीधी थी
नयी जवानी में दिमाग़ थोड़ी कम चली
पर रगरु के साथ सब जल्दी ख़त्म हुआ
अच्छी किस्मत थी, ज़यादा कुछ नही हुआ
अब थी घुसलू की बारी, आवारा और अय्याशी
फँस गयी उसकी जाल में अपनी पूनिया बेचारी
कॉलेज के नाम पे शहर जाना, घर देर से आना
ज़मींदार को अंदेशा लगा, इसमे कुछ काला है
और लगा दी पाबंदी, घर के बाहर नही जाना है
पर किस्मत तो घुसलू के साथ होती है
पूनिया तो बस उसकी टाइम पास होती है
भूस्की रानी अब उसे जो मिल गयी थी
कॉलेज फिर से नियमित चलने लगी थी
पूनिया को जब पता चला, लाख कोशिश की
पर घुसलू दिल दिमाग़ से नही निकला
कुछ महीने लगे, पर अंत में आँख खुली
मेले में घुसलू के साथ चिपकी भूस्की दिखी
सब कुछ बेचारा जूज्जी बरसों देखता रहा था
पूनिया के ठुकराने पर भी प्यार करता रहा
सच्चा प्यार शायद एक तरफ़ा ही होता है
ये तसल्ली कर प्यार में जलता रहता है
पूनिया ने ठान ली अब, हुआ बहुत प्रेम प्रसंग
शादी कही भी कर लेगी जो पिता की हो पसंद
पूनिया की शादी दीनानाथ मास्टर से होनी है
घुसलू की चाँदी, पर जूज्जी का प्यार धनी है
चिलम की चुस्की लेने हज़ाम की दूकान पहुँचा
पर धीरे धीरे कई उत्सुक लोगो की भीड़ जमी
चिलम सुलगा उसने एक ज़ोर की तान भरी
पर मुँह से धुएँ के साथ जो निकला
लोगों के अवाक चेहरों पे जा कर लगा
बड़ी खिलाड़ी थी अपनी पूनिया भी
ज़मींदार के डर से बात गले अटक गयी
और कहा कई मेडल जीते हैं पूनिया ने
चौकीदार लगा कुछ छुपा रहा है राज़
लोगों के समझ आ गयी कुछ है बात
चौकीदार को भी आया ये याद
पूनिया तो कभी कुछ खेलती ही नही
इतने लोगों की आँखें खुद पर टिकी देख
चौकीदार थोड़ा घबराया, आँखें नीची की
और काफ़ी सारे कस एक साथ लगाया
फिर यादों के धुंधले परत सॉफ करने लगा
पूनिया का सारा प्रसंग चोंक पे नंगा होने लगा
ज़मींदार की बेटी, जो बुजुर्गों के लिए थी मिसाल
उसके निकले कई नोंजावानों से प्यार के गाँठ,
उनमें से तीन के नाम चौकीदार को थे याद
रगरु के बाद घुसलू और जूज्जी उसके थे पात्र
पूनिया की पहली आँख रगरु से मिली थी
स्कूल में मिले थे दोनो, बेचारी बड़ी सीधी थी
नयी जवानी में दिमाग़ थोड़ी कम चली
पर रगरु के साथ सब जल्दी ख़त्म हुआ
अच्छी किस्मत थी, ज़यादा कुछ नही हुआ
अब थी घुसलू की बारी, आवारा और अय्याशी
फँस गयी उसकी जाल में अपनी पूनिया बेचारी
कॉलेज के नाम पे शहर जाना, घर देर से आना
ज़मींदार को अंदेशा लगा, इसमे कुछ काला है
और लगा दी पाबंदी, घर के बाहर नही जाना है
पर किस्मत तो घुसलू के साथ होती है
पूनिया तो बस उसकी टाइम पास होती है
भूस्की रानी अब उसे जो मिल गयी थी
कॉलेज फिर से नियमित चलने लगी थी
पूनिया को जब पता चला, लाख कोशिश की
पर घुसलू दिल दिमाग़ से नही निकला
कुछ महीने लगे, पर अंत में आँख खुली
मेले में घुसलू के साथ चिपकी भूस्की दिखी
सब कुछ बेचारा जूज्जी बरसों देखता रहा था
पूनिया के ठुकराने पर भी प्यार करता रहा
सच्चा प्यार शायद एक तरफ़ा ही होता है
ये तसल्ली कर प्यार में जलता रहता है
पूनिया ने ठान ली अब, हुआ बहुत प्रेम प्रसंग
शादी कही भी कर लेगी जो पिता की हो पसंद
पूनिया की शादी दीनानाथ मास्टर से होनी है
घुसलू की चाँदी, पर जूज्जी का प्यार धनी है
14 March, 2011
Tamarind Tree
Looked in to my watch
I knew, I gotta be late
Not moved a bit to rush
No energy to make up
Eyes kept watching
Traffic running around
Found myself standing
like dead man in the town
I wish you could see me
counting pebbles on road
'n flowers on every door
On my way to our alleyway
Musty me, lost and tired
giving you sense of pride
you were just so right
no you, just body no soul
That's the way you testified
Nice that you stayed alive
I had to leave for your smile
Only one could have survived
I am mute, though watching you
standing next to Tamarind tree
When you find earrings missing
Search on boughs in Spring
I knew, I gotta be late
Not moved a bit to rush
No energy to make up
Eyes kept watching
Traffic running around
Found myself standing
like dead man in the town
I wish you could see me
counting pebbles on road
'n flowers on every door
On my way to our alleyway
Musty me, lost and tired
giving you sense of pride
you were just so right
no you, just body no soul
That's the way you testified
Nice that you stayed alive
I had to leave for your smile
Only one could have survived
I am mute, though watching you
standing next to Tamarind tree
When you find earrings missing
Search on boughs in Spring
04 March, 2011
सिर्फ़ जता ना सके...
तुम जो गये यूँ की
मेरी शामे मुरझा गयी
पत्तों के साथ साथ
हम भी गिरते गये
जब तुम थे तो भी
दिन कुछ ख़ास नही थे
जाना है तुम्हे कभी भी
बस वाट जौहते रहते
ना तुम कभी मेरे थे
कोई ना हक़ था मेरा तुमपे
दरमियाँ थी बात अपने जो
भरे महफ़िल में ना कहते
चाहते हैं तुम्हे दिल से
ना तुम्हे ये समझा सके
जाते हुए दिल तो तोड़ा
मेरी रूह को तो छोड़ते
मेरी शामे मुरझा गयी
पत्तों के साथ साथ
हम भी गिरते गये
जब तुम थे तो भी
दिन कुछ ख़ास नही थे
जाना है तुम्हे कभी भी
बस वाट जौहते रहते
ना तुम कभी मेरे थे
कोई ना हक़ था मेरा तुमपे
दरमियाँ थी बात अपने जो
भरे महफ़िल में ना कहते
चाहते हैं तुम्हे दिल से
ना तुम्हे ये समझा सके
जाते हुए दिल तो तोड़ा
मेरी रूह को तो छोड़ते
20 February, 2011
साथ बचा सब खाली है
रह-रह कर ये जो बारिश आती है
कुछ बूँदों से मेरी आँखें सूखा जाती है
काश किसी दिन कोई तूफान भी आता
मेरी टूटती साँसे बहा कर जाता
ये साकी को क्या हुआ आज शाम
जो गीन गीन कर प्याले भर रही है
कोई तो समझाए उसे कुछ असर नही
पैमानो के टूटे कई बरस हो चूके
हर चीज़ आधी अधूरी मिलती गयी
बिना शिकायत थामता भी रहा
जब लगा की कुछ पूरा मिला
हथेली खोली तो फिर टुकरा निकला
इतने गुलशन आए कितने आने बाकी है
पर जो बहार तेरे साथ गुज़ारे हमने
ना मैने कभी देखे हैं, ना कभी देखेंगे
वो रात कभी ना भूले हैं, ना कभी भूलेंगे
कुछ ख़ास दिखी थी बात तुझमे
सब साथ मेरे थी, और वो मेरी है
कितने मंज़र तेरे साथ देखे मैने
पीछे छूटे सारे पतझर बाकी हैं
कुछ बूँदों से मेरी आँखें सूखा जाती है
काश किसी दिन कोई तूफान भी आता
मेरी टूटती साँसे बहा कर जाता
ये साकी को क्या हुआ आज शाम
जो गीन गीन कर प्याले भर रही है
कोई तो समझाए उसे कुछ असर नही
पैमानो के टूटे कई बरस हो चूके
हर चीज़ आधी अधूरी मिलती गयी
बिना शिकायत थामता भी रहा
जब लगा की कुछ पूरा मिला
हथेली खोली तो फिर टुकरा निकला
इतने गुलशन आए कितने आने बाकी है
पर जो बहार तेरे साथ गुज़ारे हमने
ना मैने कभी देखे हैं, ना कभी देखेंगे
वो रात कभी ना भूले हैं, ना कभी भूलेंगे
कुछ ख़ास दिखी थी बात तुझमे
सब साथ मेरे थी, और वो मेरी है
कितने मंज़र तेरे साथ देखे मैने
पीछे छूटे सारे पतझर बाकी हैं
03 February, 2011
A dark shadow of mine..
Goes my mind freaking
when I see
a dark shadow
just not stop following me
Albeit knowing all my riddles n sins
and my developing reprisal,
it keeps telling me
a cock-and-bull story to impress
At times I start listening
when I see
all angelic words
but no real meaning
Goes my mind freaking
when I close my tired eyes
to see
dark shadow disapprearing,
I strech my hands
to stop
but only to be slugged
in my long insane dream
That's the only time
when nothing me following
I be free from any expectations
or any relations, that binding me
when I see
a dark shadow
just not stop following me
Albeit knowing all my riddles n sins
and my developing reprisal,
it keeps telling me
a cock-and-bull story to impress
At times I start listening
when I see
all angelic words
but no real meaning
Goes my mind freaking
when I close my tired eyes
to see
dark shadow disapprearing,
I strech my hands
to stop
but only to be slugged
in my long insane dream
That's the only time
when nothing me following
I be free from any expectations
or any relations, that binding me
29 January, 2011
एक एहसास छोड़ती जाना
मूड कर तुम देखो या ना देखो
बस एक एहसास छोड़ती जाना ज़रूर
कभी जो लौटोगे इधर तक
कुछ बातें करने को होंगी
अजनबी लगो जब मिलोगे कभी
इतनी खामोशी ना छोड़ जाओ
शाम में थॅकी आखें लगेंगी
तो ये और घायल करेंगी मुझे
अधूरी साँसे जो रह गयी अटकी
उन्हे यूँ रहने दो अभी वहीं
फ़ुर्सत में जब भी बैठेंगे
तो उन्हे साथ जी लेंगे कभी
आखों में सुनेपन से लिपटे आँसू
और दिल में दर्द की कुछ गाँठे
मेरे मौला आज तूने इतना दिया
जो कुछ भी मेरे पास खाली नही
मिलोगे फ़ुर्सत में कभी
तो बातें होंगी बाक़ी सारी
अभी एक एहसास छोड़ती जाना
लौटोगे तो मिलूँगा सोचते तुम्हे यही
बस एक एहसास छोड़ती जाना ज़रूर
कभी जो लौटोगे इधर तक
कुछ बातें करने को होंगी
अजनबी लगो जब मिलोगे कभी
इतनी खामोशी ना छोड़ जाओ
शाम में थॅकी आखें लगेंगी
तो ये और घायल करेंगी मुझे
अधूरी साँसे जो रह गयी अटकी
उन्हे यूँ रहने दो अभी वहीं
फ़ुर्सत में जब भी बैठेंगे
तो उन्हे साथ जी लेंगे कभी
आखों में सुनेपन से लिपटे आँसू
और दिल में दर्द की कुछ गाँठे
मेरे मौला आज तूने इतना दिया
जो कुछ भी मेरे पास खाली नही
मिलोगे फ़ुर्सत में कभी
तो बातें होंगी बाक़ी सारी
अभी एक एहसास छोड़ती जाना
लौटोगे तो मिलूँगा सोचते तुम्हे यही
15 January, 2011
सच है सपने हक़ीकत नही होते
ये नींद खुली ही मेरी क्यों,
जो मैंने सिर्फ़ करवट उलटी,
सूखे गले से आवाज़ ग़ायब
शायद आज फिर सपना देखा है,
अंतर्मन मेरा सहमा होता है
मेरे सोने पे अकेले होने से,
हर रात डरा मुझसे लिपट कर
पिछली रात की बातें बताता है
उसकी बातें किसी सपने सी बेजान,
मेरी ही अधूरी कहानी के पन्ने लगते है
नीरस हो मुझे बेख़बर ज़ो नींद आती है
सुबह मृत सपने बिस्तर पे बिखरे पता हूँ
औरों के होंगे सपने सतरंगी सुहाने
मेरे तो मृत पड़े भी बेरहम दिखते हैं
तशल्ली इस बात होती है मुझे
सुबह होने पे ये खुद टूटे मिलते हैं
सच है सपने हक़ीकत नही होते
जो मैंने सिर्फ़ करवट उलटी,
सूखे गले से आवाज़ ग़ायब
शायद आज फिर सपना देखा है,
अंतर्मन मेरा सहमा होता है
मेरे सोने पे अकेले होने से,
हर रात डरा मुझसे लिपट कर
पिछली रात की बातें बताता है
उसकी बातें किसी सपने सी बेजान,
मेरी ही अधूरी कहानी के पन्ने लगते है
नीरस हो मुझे बेख़बर ज़ो नींद आती है
सुबह मृत सपने बिस्तर पे बिखरे पता हूँ
औरों के होंगे सपने सतरंगी सुहाने
मेरे तो मृत पड़े भी बेरहम दिखते हैं
तशल्ली इस बात होती है मुझे
सुबह होने पे ये खुद टूटे मिलते हैं
सच है सपने हक़ीकत नही होते
क़दरदान
खरीदारों से भरे इस बाज़ार में
नुमाइश से सारोबोर हर चोवराहा
चंद सिक्कों पे बिकती यहाँ मधुबाला
पर कदरदानो की जब बात चले
तो महफ़िल में हम भी आएँगे
सिक्के ना सही तो ग़म नही
एक मधुबाला हम भी ले जाएँगे
नुमाइश से सारोबोर हर चोवराहा
चंद सिक्कों पे बिकती यहाँ मधुबाला
पर कदरदानो की जब बात चले
तो महफ़िल में हम भी आएँगे
सिक्के ना सही तो ग़म नही
एक मधुबाला हम भी ले जाएँगे
एक पुराना प्रसंग और मेरा अंतरदवन्द
आज फिर से भभूत कुरेदे जाएँगे,
पुराने प्रसंग पर लोग मारे जाएँगे,
क्या ग़लत और सही, मैं नही जानता,
बस पता है मुझे तो सिर्फ़ ये
हर बात पे आज ज़ंग लड़े जाएँगे
हर दिलो में मंदिर टूटते पल पल
मस्जिदें हैं दम तोड़ती इंसानियत के साथ
फ़िक्र ना किसी एक हिंदू को
ना है कोई मुसलमान इससे परेशन
अपने सिने में एक मंदिर बचाए हुए हूँ,
टूटने के डर से कही अंदर छुपाए हुए हूँ
इंतेज़ार है किसी मुस्लिम के आने का
जो तोड़ चुका अपना मस्जिद, खुदा जिससे नाराज़ है
एक बार जो मेरी इंसानियत भी मर जाए
सो मैं भी पागलों सा सड़क पे उन्माद करू
किसी निरीह का मस्जिद मैं भी बर्बाद करू
भरकायूं दंगे जी जान से हर जगह,
जला दूं हर चीज़ जो दिखे मेरे सामने
इस देश के कुछ तुकरे और कर दूं
कही राम और कही रहीम को मरते देखूं
शायद मेरी आत्मा तब कही शाँत होगी
फिर बिलख कर अपने मारे इंसान टटोलेगी
नही मिलेगा उससे कुछ रक्त सिंचित चितारे के अलावा
मारना चाहे भी तो क्या
वो फिर दुबारा कैसे मरेगी.
पुराने प्रसंग पर लोग मारे जाएँगे,
क्या ग़लत और सही, मैं नही जानता,
बस पता है मुझे तो सिर्फ़ ये
हर बात पे आज ज़ंग लड़े जाएँगे
हर दिलो में मंदिर टूटते पल पल
मस्जिदें हैं दम तोड़ती इंसानियत के साथ
फ़िक्र ना किसी एक हिंदू को
ना है कोई मुसलमान इससे परेशन
अपने सिने में एक मंदिर बचाए हुए हूँ,
टूटने के डर से कही अंदर छुपाए हुए हूँ
इंतेज़ार है किसी मुस्लिम के आने का
जो तोड़ चुका अपना मस्जिद, खुदा जिससे नाराज़ है
एक बार जो मेरी इंसानियत भी मर जाए
सो मैं भी पागलों सा सड़क पे उन्माद करू
किसी निरीह का मस्जिद मैं भी बर्बाद करू
भरकायूं दंगे जी जान से हर जगह,
जला दूं हर चीज़ जो दिखे मेरे सामने
इस देश के कुछ तुकरे और कर दूं
कही राम और कही रहीम को मरते देखूं
शायद मेरी आत्मा तब कही शाँत होगी
फिर बिलख कर अपने मारे इंसान टटोलेगी
नही मिलेगा उससे कुछ रक्त सिंचित चितारे के अलावा
मारना चाहे भी तो क्या
वो फिर दुबारा कैसे मरेगी.
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