बड़ी विचित्र बात है,
लोगों में आज भी बची आग है
हर रोज़ उसी सिरहाने में
खाली पेट के बाल सोते हुए
समस्याओं को कोसते हुए भी
सड़क पर मसाल लेकर चलने की
बस एक परिवर्तन करने की चाह है
निराशावादी पूछते हैं कि
क्या बदल जाएगा ऐसी चाह से
मैं मुस्कुराता सोचता हूँ
लोगों के ज़ज़्बात ना घटे बस
दिन वो दूर नही
जब दिल्ली भी स्विट्ज़र्लॅंड बन जाएगा
No comments:
Post a Comment