या खुदा ये तू नही हो सकता
बुझे दिल में तेरी शान नही होती
ये तो मेरे अरमानों का मकबरा है
यहा तू कभी नही बैठ सकता
ये तू नही, ना तेरे क़ायदे हो सकते
यहा तेरे इस बंदे का कतल हुआ है
जो मज़ार बनाया है उसके नाम का
तेरी शान वहाँ आने से कहाँ
ये ज़ुल्म ना कर आका मेरे उपर
इंसानो को समझ मेरी लब नही आई
पर तू तो इंसानियत की कदर कर
बस चला जा यहा से मेरी रूह ले कर
मजबूर होना जायुं मैं तुझे छोड़ने पर
मेरे मौला, ये बदनशिबी ईजाद ना कर
इश्क़ के बदले मुझे बर्बाद ना कर
मक़बरे पे मेरे कोई दरगाह ना बक्श
खो जाने दे मुझे गाळीचों में गुमनाम
मेरी मौत को कोई अफ़साना ना बना
इंसानियत की कद बढ़े ये तू नही चाहता
मैं तू नही, पर खुदा ये तू नही हो सकता
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