20 November, 2010

खाली कटोरा, बेकार कुदाल

लूट गये इस ज़माने में सारे बड़े होशियार,
किसी का खोटा सिक्का चला किसी ने खाई उधार !
मेरे हाँथ कटोरा आया सो हमने उठाई कुदाल,
पर जहा चलाई कुदाल वो निकाला पत्थर मेरे यार !!

पर फूटी किस्मत पे रोया नही,
खाली कटोरा भी कम काम का नही !
पर इधर भी लगी भारी भीड़ है,
कतार मे खड़े कई मुझसे फकीर हैं !!

इतने में आए एक नये दाता,
बतलाने लगे अपनी ही परिभाषा !
भीख तू क्यूँ माँग रहा नलायक,
कहा उठा कुदाल शुरू कर खुदाई !!

पर वो थे छिपे कहानी से अंज़ान,
भिखारी के हाँथ में भले एक कटोरा हो !
पर दिमाग़ में रहती है संगीन दास्तान,
खुदा नही जिसे, उससे ख़ुदाया से क्या काम !!

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