20 February, 2011

साथ बचा सब खाली है

रह-रह कर ये जो बारिश आती है
कुछ बूँदों से मेरी आँखें सूखा जाती है
काश किसी दिन कोई तूफान भी आता
मेरी टूटती साँसे बहा कर जाता

ये साकी को क्या हुआ आज शाम
जो गीन गीन कर प्याले भर रही है
कोई तो समझाए उसे कुछ असर नही
पैमानो के टूटे कई बरस हो चूके

हर चीज़ आधी अधूरी मिलती गयी
बिना शिकायत थामता भी रहा
जब लगा की कुछ पूरा मिला
हथेली खोली तो फिर टुकरा निकला

इतने गुलशन आए कितने आने बाकी है
पर जो बहार तेरे साथ गुज़ारे हमने
ना मैने कभी देखे हैं, ना कभी देखेंगे
वो रात कभी ना भूले हैं, ना कभी भूलेंगे

कुछ ख़ास दिखी थी बात तुझमे
सब साथ मेरे थी, और वो मेरी है
कितने मंज़र तेरे साथ देखे मैने
पीछे छूटे सारे पतझर बाकी हैं

3 comments:

Sourabh Choudhary said...

जब लगा की कुछ पूरा मिला
हथेली खोली तो फिर टुकरा निकला..
Bht umdaaaa.
Kamaaal ka likha hai...

roc said...

shak....what u said again???lol...did not get a word u wrote...:)

Shakti Sourav said...

learn hindi soon ullu..or i shall switch to enlish more..